रामानुज मठ , गया ( बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं- इस ‌समाचार का नौवां भाग यहां से पढ़िए-

अवध और दिलीप सिंह के सबसे बड़े भाई डॉ बच्चू नारायण सिंह, जो वर्तमान में गुरू गोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज, गुरुगांव में प्रोफेसर हैं ।

कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह) ————तब मैं सोचा कि हो सकता है अभी महात्मा जी अवध और दिलीप के साथ रामानुज मठ , गया में रह रहे होंगे । शायद अभी यहां से ‌नहीं गये‌ होंगे । मैं बहुत जल्दी से जल्दी दौड़ते हुए वहां ‌गया, परंतु पूछने पर पता चला कि वे करीब चार बजे हीं रामानुज मठ, गया से निकल गये हैं । तब मैं इसके बाद गया जंक्शन के अनेक प्लेटफार्म पर महात्मा जी को खोजा, परंतु वे वहां भी मुझे नहीं मिले । इसके बाद मैं घर पर लौट आया था । जब सुबह हुई तो मैं अपने बड़े भाई डॉ बच्चू नारायण सिंह को फोन किया और सभी बातों को उन्हें अवगत कराया । इसके बाद वे भी देवनारायण आचार्य जी को पता लगाने लगे । लेकिन लाख कोशिश के बाद वे कहां गए, कुछ भी पता नहीं चल सका । तब हमसब इंतजार करने लगे कि हो सकता है कि महात्मा जी के साथ पंद्रह या एक महीना के बाद गया वापस आयेंगे, परंतु एक महीना इंतजार के बाद न घर पर महात्मा जी कोई खबर दिए और नहीं अवध और दिलीप ने घर पर कोई पत्र भेजा । तीनों में से कोई भी मोबाइल नंबर पर भी बात नहीं किए ।श्री देवनारायण आचार्य जी के पास कोई मोबाइल नहीं था । इसलिए उनसे बातचीत करना कठिन था । मेरे दोनों भाइयों के पास भी मोबाइल नहीं था। लेकिन डॉ बच्चू नारायण सिंह के पास मोबाइल नंबर था,जिस पर वह खबर दे सकता था । परंतु दोनों भाइयों ने कोई खबर डां० बच्चू नारायण सिंह को नहीं दिए और नहीं घर पर कोई पत्र भेज सके । इस प्रकार मैं बहुत दुःखी रहने लगा और अपने माता-पिता पर बहुत क्रोधित होता ‌रहता था । तब मैं एक दिन पिता जी से क्रोधित होकर कहा कि आप दोनों को भेजे थे, इसलिए अब आप ‌खुद पता लगाइए कि वे दोनों कहां गए हैं? तब पिताजी मेरी बात को सुनकर कारा ( जेल) पुलिस , गया के श्री शिववचन सिंह के साथ राधाकृष्ण मठ, कछला ब्रिज, पुलिस स्टेशन, जिला- बदांयू, उत्तर प्रदेश पहुंचे । वहां पहुंचने के बाद उस मठ के महंत श्री उपेन्द्र आचार्य जी से भेंट ‌किए ।- इस समाचार के दसवीं भाग बाद में पढ़िए –

Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल