रामानुज मठ, गया (बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं ।- इस समाचार के आठवीं भाग यहां से पढ़िए——-

(कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा)……………….. जिस प्रकार से विश्वामित्र मुनि जी के कहने पर राजा दशरथ जी ने अपने प्यारे दोनों पुत्रों को दे दिए, ठीक इसी प्रकार से आप भी अवध सिंह और दिलीप सिंह को मेरे साथ जाने की ‌आज्ञा दे दीजिए, तो ‌यह‌ आपका सबसे बड़ी सहयोग माना जाएगा । अगर दोनों पुत्रों को मुझे दे देंगे, तो मैं उन दोनों को पढ़ा-लिखाकर विद्वान बनाउंगा ।साथ हीं हम यज्ञ के कार्य में सहयोग भी लेता रहूंगा । मैं आपको पूरा विश्वास दिलाता हूं कि आपके पुत्रों को किसी प्रकार का कष्ट नहीं होने दूंगा । यह दोनों फिर आपके पास एक महीना के बाद घर भी आयेगा । इसलिए आप बिल्कुल भी चिंता नहीं कीजिए ।श्री देवनारायण आचार्य जी ने अवध सिंह के पिताजी से गोस्वामी तुलसीदास जी का एक दोहा कहा-तुलसी चिंता राम की, निर्भय होके सोय ।होनी है तो होके रही, अनहोनी टाले न कोय । अर्थात आप अपनी चिंता को ‌श्री राम के भरोसे छोड़ दीजिए । जो होना रहेगा, तो वह होके हीं रहेगा और जो भाग्य में नहीं होना रहेगा,वह चाहने पर भी नहीं मिलेगा । इस प्रकार अवध सिंह और दिलीप सिंह के पिताजी से मीठी-मीठी वचन सुनाकर उनको प्रभावित कर दिए ।भागयवादी होने के कारण अवध सिंह के पिताजी श्री देवनारायण आचार्य जी के जाल में फंस‌ गये ।अंत में उन्होंने अवध सिंह और दिलीप सिंह को श्री देवनारायण आचार्य जी के साथ बाहर आश्रम पर जाने की आज्ञा दे ‌दिए ।श्री देवनारायण आचार्य जी ने मेरे दोनों भाइयों को माता- पिता के आज्ञा से अपने साथ लेकर चले गए । इसके बाद मैं घर पर शाम को वापस आया और अवध सिंह और दिलीप सिंह को यहां नहीं देखा, तब मैं अपने माता-पिता से पूछा कि दोनों कहां गए हैं? अभी तक बाहर क्या कर रहा है ? तब मुझे माता-पिता ने सभी बात बताये । मैं सभी बात सुनने के बाद उनसे क्रोधित होकर कहा कि आप एक अनजान महात्मा के साथ उन दोनों को क्यों बाहर जाने दिए ? आज – कल का समय ऐसे हीं ख़राब है । आप बिना सोचे- समझे हीं उनके साथ क्यों भेज दिए ? कम-से-कम मुझसे तो पूछ लेते । लेकिन आप मुझसे भी नहीं पूछे । आप बताइए कि उस पाखंडी बाबा ने उन दोनों को कहां लेकर गये हैं ? वे मुझसे कहने लगे कि उन दोनों को वे कछला ब्रिज, पुलिस स्टेशन के निकट राधाकृष्ण मठ, जिला- वदांयू, उत्तर प्रदेश ले गए हैं । मैंने कहा कि आप उन दोनों को उनके के साथ भेजे हीं क्यों? अब मैं कहां खोजने जाऊं? रात होने वाला है । मैं इस समय किधर जाऊं ? माता-पिता को दिमाग खराब हो गया है । अवध और दिलीप भी पागल हो गया है ।वे दोनों एक अनजान महात्मा के साथ क्यों गये? उन दोनों को क्या परेशानी था, जिसे उसने मुझसे बताया भी नहीं ।हे भगवान मैं अब क्या करूं और किससे कहूं ? – इस अंक का नौवां भाग बाद में पढ़िए –

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