रामानुज मठ, गया ( बिहार ) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं- इस समाचार का सांतवां भाग यहां से पढ़िए–

kranti news bihar , (कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा)…………….. जब मैं श्री देवनारायण आचार्य जी के साथ बाहर जाने से मना कर दिया, तब कुछ दिनों के बाद अवध सिंह और दिलीप सिंह ने मुझे बिना बताए हीं रामानुज मठ, गया में श्री देवनारायण आचार्य से मिलने के लिए गए थे । मुझसे नाराज़ होकर श्री देवनारायण आचार्य जी ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए मेरे दोनों छोटे भाइयों को बहला -फुसलाकर अपने साथ बाहर ले जाने के लिए तैयार कर लिए । तब मेरे दोनों छोटे भाइयों ने श्री देवनारायण आचार्य जी से‌ कहा कि आप हम दोनों भाइयों को बाहर ले जाने के पहले हमारे माता-पिता से एक बार मिल लीजिए ।श्री देवनारायण आचार्य जी ने उन दोनों से कहा था कि – ठीक है, मैं आपके माता-पिता से अभी मिलना चाहता हूं । वे कहां पर ‌रहते हैं? इस प्रश्न को सुनकर अवध सिंह ने श्री देवनारायण आचार्य जी से कहा कि महात्मा जी- मेरे माता-पिता पास में हीं करसिली मुहल्ला में किशन लाल भैया पंडाजी के मकान में रहते हैं । यह मकान श्री विष्णुपद मंदिर के नजदीक पड़ता है । अगर आप चाहें तो मैं उनसे तुरंत मिलवा सकता हूं । इस बात पर श्री देवनारायण आचार्य जी ने मेरे दोनों छोटे भाइयों से कहा कि चलो, मैं अभी तुम दोनो के साथ तुम्हारे माता-पिता से एक बार मिल लेता हूं । फिर अवध सिंह ने कहा कि आप चलिए , मैं अपने माता-पिता से मिलवा देता हूं ।श्री देवनारायण आचार्य जी मेरे दोनों भाइयों के साथ में करसिली मुहल्ला में किशन लाल भैया पंडाजी के मकान में उनके माता-पिता के साथ मिलने पहुंच जाते हैं और अवध और दिलीप सिंह के माता-पिता जी को वे जय जय श्री राम जी कहकर मिलते हैं । तब अवध सिंह के माता-पिता ने श्री देवनारायण आचार्य जी को बैठाकर आदर-सत्कार किए । तब अवध सिंह के पिताजी ने उनसे कहा कि आप किस कारण से यहां आये हैं ? आपको हमसे क्या सहयोग चाहिए ? इस बात को सुनकर श्री देवनारायण आचार्य जी ने कहा कि मैं जैसा सहयोग आपसे मांगूंगा, वैसा सहयोग आप कभी भी दे नहीं सकते हैं? इस बात पर अवथ सिंह के पिताजी ने महात्मा जी से कहा कि अगर सहयोग करने के लायक काम होगा, तो मैं आपको अवश्य सहयोग करूंगा । पहले आप काम तो बताइए । मैं पहले आपको बता कर क्या करुंगा? आप सुनते हीं मुझे सहयोग नहीं करेंगे । इसके बाद अवध के पिताजी ने कहा कि बिना सुने ‌मैं आपको क्या और कैसे सहयोग दे सकता हूं? आप मुझे बता दीजिए, तब मैं उस पर विचार करने के बाद मैं आपको अवश्य सहयोग करूंगा । तब महात्मा जी ने उसके पिताजी से ‌कहा कि आपके दोनों बालक मुझे बहुत ही पसंद है । वे दोनों श्री राम- लक्ष्मण की जोड़ी तरह लगते हैं । मैं आपके दोनों बालक को बाहर अपने साथ ले जाना चाहता हूं ।आपके दोनों बालक बहुत हीं होनहार हैं । एक सांवला है, तो दूसरा गोरा । जैसे यज्ञ के रक्षा के लिए श्री विश्वामित्र मुनि जी ने त्रेता युग में राजा दशरथ जी से श्री राम – लक्ष्मण को मांगें थे, वैसे हीं मैं आपसे अपनी यज्ञ की रक्षा के लिए आपसे अवध सिंह और दिलीप सिंह को मांगने आया हूं । विशेष इस अंक का शेष भाग आठवीं अंक में पढ़िएगा …

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