श्री राम जी ने अज्ञात जाति की सीता के साथ विवाह करके जातिवाद पर करारी चोट मारे थे ।

क्रांति न्यूज, बिहार-( कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा ) :-
आज के समय में जातिवाद से लड़ने को कोई तैयार नहीं हैं । अधिकांशतः जातिवादी संगठन बनाने पर जोर दे रहे हैं। आखिर ऐसा वे सब क्यों कर रहे हैं? जबकि कबीरदास दास जी ने कहा था —जाति न पूछो मानव की,पुछ लीजिए ज्ञान ।मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान ।। फिर भी जाति के नाम पर राजनीति क्यों कर रहे हैं?
श्री राम जी ने राजा जनक की पाली- पोषी लड़की सीता के साथ विवाह किए, जो अज्ञात जाति की थी । अर्थात सीता किस जाति की लड़की थी? इस बात को श्री राम जी ने पूछा ही नहीं कि सीता कौन- सी जाति की लड़की थी? आखिर श्री राम जी ने अपनी शादी में सीता की जाति को क्यों नहीं जांच किए? श्री राम जी के मन में कोई जाति की भावना नहीं थी।यही कारण था कि शादी के समय श्री राम ने किसी से सीता जी की जाति को पता नहीं किए । अगर पता भी करते, तो भी सीता जी की जाति पता नहीं लगती, क्योंकि सीता की जाति के संबंध में जानकारी स्वयं राजा जनक जी को भी मालूम नहीं था। श्रीमति सीता जी राजा जनक की अपनी पुत्री नहीं थी ।वे तो हल चलाते समय एक घड़ा में सीता जी को प्राप्त किए थे । जिसे वे पाल पोषकर बड़ी किए । परंतु आज- कल के सभी लोग जाति पुछकर लड़की और लड़का का शादी -विवाह क्यों कर रहे हैं? क्या आज के समय में योग्यता के आधार पर शादी -विवाह नहीं हो सकते ? लेकिन श्री राम ने ‌जाति पूछे बिना हीं सीता से विवाह करके जातिवाद पर करारी चोट किए थे ।

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