प्रधानमंत्री ने सिर्फ जनरल वर्ग वाले को आर्थिक आधार पर आरक्षण क्यों दिए हैं?

क्रांति न्यूज, बिहार…..(. कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा..):- आर्थिक आधार पर आरक्षण उचित है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सिर्फ जनरल वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण क्यों दिए? वे क्यों नहीं एससी, एसटी एवं बीसी वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए? अगर प्रधानमंत्री जी को आरक्षण देना हीं था, तो क्यों नहीं संविधान संशोधन कर के सभी वर्गों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए? लोग कहते हैं कि श्री मोदी जी हैं, तो मुमकिन है। अगर मोदी जी से मुमकिन है तो वे क्यों नहीं आर्थिक आधार पर पिछड़े ,एस सी, एवं एसटी वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दे देते ? वे सिर्फ जनरल वर्ग को ही आर्थिक आधार पर आरक्षण क्यों दिए? इसके पीछे श्री नरेन्द्र मोदी जी का कौन- सी राजनीति खेल है? अगर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी में हिम्मत है तो वे जाति के वजाय आर्थिक आधार पर सभी वर्गों को आरक्षण लागू करके दिखाएं, तब जनता मानेगी कि सचमुच में श्री नरेन्द्र मोदी जी में ताक़त है ।जातिवादी मानव कितना भी अच्छा क्यों नहीं हो, लेकिन वह देश व समाज के हित में नहीं होता है । आज के समय में जाति को मिटाने के वजाय उसे बढ़ावा देने में लगे हुए हैं ।
सभी राजनीतिक पार्टियों को अपनी- अपनी कुर्सी की चिंता लगी रहती है, पंरतु जाति को मिटाने की चिंता उन्हें लेश मात्र भी नहीं है । उपर- उपर से नेतागण जातिवाद को मिटाने का चाहे खूब नाटक क्यों न कर ले, लेकिन जनता इससे खुश नहीं होंगे।
करीब-करीब सभी पार्टियां जातिवाद को बचाने में क्यों लगीं हैं? इनके अनेक कारण हैं। सभी नेता को

लगता है कि जाति की भावना को उभारकर राजनीति की रोटी

सेंकने में सबसे ज्यादा लाभ मिलता है। इसलिए वे सब जाति के आधार पर राजनीति खेलते रहते हैं । कोई भी पार्टी दूध से धोयी हुई नहीं है । जनता भी ऐसे पार्टियों को सहायता करने में सबसे आगे हैं।

आज हम सभी जानते हुए भी कि जाति पर आधारित आरक्षण देश व समाज के लिए घातक है, फिर भी उसे संविधान से हटाने के वजाय बचाने में लगे हुए हैं । क्या जाति के आधार पर आरक्षण देना न्याय है? अगर जाति के आधार पर आरक्षण देना न्याय नहीं है तो फिर क्यों नहीं सभी नेता मिलकर जाति
को मिटाने का भरपूर प्रयास करते हैं? क्या जाति पर आधारित आरक्षण की व्यवस्था करने वाले डॉक्टर भीमराव आंबेडकर सही नेता थे ? जनता कहती है कि वे बिल्कुल ग़लत नेता थे क्योंकि जाति पर आधारित आरक्षण से समानता एवं भाईचारे को खतरा है । इस व्यवस्था से एससी , एसटी एवं बीसी वाले वर्गों को तो फायदा है पंरतु इससे जनरल वाले वर्ग के लोगों को क्या लाभ है ? क्या यह भेदभाव नहीं है? क्या इसे ही समानता व भाईचारा कहते हैं ? क्या जाति पर आधारित आरक्षण से सिर्फ़ गरीब लोगों को आरक्षण मिलते हैं? क्या इस व्यवस्था से धनवान लोगों को भी आरक्षण मिलते हैं? इन सभी प्रश्नों के उत्तर यह है कि जाति पर आधारित आरक्षण से जनरल वाले वर्ग को कुछ भी लाभ नहीं हैं।यह सरासरी अन्याय है । इससे समाज में कभी समानता व भाईचारा स्थापित नहीं हो सकती है । इस व्यवस्था से सिर्फ जाति पर आधारित गरीब व अमीर दोनों को आरक्षण मिलते हैं, जो कि यह अन्याय है । जनता कहती है कि सिर्फ गरीबी के आधार पर गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए,न की अमीरों को । एससी, एसटी एवं बीसी वर्ग के धनवानो को आरक्षण क्यों मिल रही हैं? जनरल वर्ग के दस प्रतिशत आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया गया है, पंरतु इससे धनवान लोगों को आरक्षण नहीं मिलते हैं। जबकि अन्य वर्ग के लोगों को जाति के आधार पर गरीब एवं अमीर- दोनों को आरक्षण क्यों मिलते हैं? क्यों नहीं आरक्षण को सभी वर्गों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाएं? आर्थिक आधार पर आरक्षण से देश में जातिवाद भी समाप्त होने के साथ-साथ समानता एवं भाईचारे की मिसाल कायम होंगी । इससे आर्थिक समानता आयेगी एवं गरीबी भी मिटेगी ।

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