धर्मधारा

श्रीगुरु उवाच
वनस्पति, प्राणी, मानव इत्यादिमें साम्यवाद नहीं । इतना ही नहीं, पृथ्वीपर ७०० कोटिसे अधिक मानवोंमें किन्ही दोके धन, शिक्षण, शरीर, मन, बुद्धि तथा चित्तमें भी समानता नहीं ।

१. साधक क्यों करे स्वाभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया ? (भाग – १३)
निर्विकल्प साधना करने हेतु एवं साधनाके मध्य बार-बार आनेवाले विकल्पोंके निर्मूलन हेतु करें अहम् और दोषोंके निर्मूलन हेतु करे यह प्रक्रिया
अनेक साधक साधना तो करना चाहते हैं; किन्तु अस्थिर वृत्तिके कारण वे साधनामें सातत्य नहीं रख पाते हैं । जैसे उपासनाके मार्गदर्शनमें कुछ ऐसे साधक साधनारत हैं, जो साधना करना चाहते हैं; किन्तु अपने अस्थिर वृत्तिके कारण उसमें सातत्य नहीं बना पाते हैं ।
जब मैंने इसके कारणपर चिंतन किया तो ज्ञात हुआ कि
१. ऐसे साधकोंमें अहंका प्रमाण अधिक होता है, यदि उनके अहंको किसी भी माध्यमसे किंचित मात्र भी ठेस पहुंचती है तो उन्हें साधक, ईश्वर या गुरु तत्त्वके प्रति विकल्प आने लगता है और वे साधना कुछ काल छोड देते हैं । जब उन्हें उनके अयोग्य दृष्टिकोण ध्यानमें दिलाए जाते हैं या उनके अहंकी पुष्टि हेतु कुछ तथ्य प्रोत्साहनके रूपमें बताये जाते हैं तो वे पुनः साधना आरम्भ करते हैं; किन्तु पुनः कुछ समय उपरान्त कोई प्रसंग निर्माण होनेपर वे साधना छोड देते हैं । यह उनसे बार-बार होता है । ऐसे सभी साधकोंको यह सूचित करना चाहेंगे कि अध्यात्म अहम् निर्मूलनका शास्त्र है और यदि आप अध्यात्ममें आगे जाना चाहते हैं तो गुरु या ईश्वर ऐसी परिस्थिति निर्माण करेंगे ही जिससे आपपर अहम् निर्मूलनकी प्रक्रिया हो और इस प्रक्रियामें आप अहं जितना अधिक होगा आपको कष्ट उतना ही अधिक होगा एवं जितना अहं कम होगा उतना ही कष्ट कम होगा; अतः अपने अहंको दूर करने हेतु अहंके लक्षणोंका अभ्यास कर उसे दूर करनेका प्रयास करें । मैंने पाया है कि ऐसे साधक मात्र साधनाके मध्यही नहीं अपितु व्यावहारिक जीवनमें भी अपने आस-पासके सभी व्यक्तियोंको अपने वर्तनसे दुखी करते हैं एवं स्वयं भी पीडामें तथा अवसादग्रस्त रहते हैं । ऐसे साधकोंको अत्यधिक मानसिक कष्ट होता है एवं अनेक बार वे भिन्न प्रकारके मनोरोगसे भी ग्रस्त होते हैं । ऐसे साधकोंको अनिष्ट शक्तियोंका भी अत्यधिक कष्ट होता है एवं वे अमावस्या और पूर्णिमाके समय तो लगभग प्रकट ही रहते हैं अर्थात उन्हें कष्ट देनेवाली अनिष्ट शक्तियां उनपर पूर्व रूपेण हावी रहती हैं ।
२. उसीप्रकार कुछ साधक सब कुछ अपने मनके अनुसार सब करना चाहते हैं; उनमें आज्ञापालनका संस्कार या परेच्छा अनुसार वर्तन करनेका संस्कार होता ही नहीं है । साधना मनके विरुद्ध जानेकी प्रक्रिया है; ऐसेमें जब तक सबकुछ आपके मनके अनुसार होगा या आप सबकुछ अपने मनके अनुसार करेंगे तब तक आपकी आध्यात्मिक प्रगति नहीं हो रही है, यह ध्यान रखें । इसीलिए अपने मनके विरुद्ध जाना सीखें एवं मनके विरुद्ध घटित होनेवाले प्रसंगोंको सहज स्वीकार करना सीखें ।
३. ऐसे साधक अपनी दस चूकें स्वयं लिखकर सभीको बताते हैं; किन्तु यदि कोई उनकी एक भी चूक बता दें तो उसे कभी त्वरित स्वीकर नहीं करते हैं । जब तक आप विनम्र होकर दूसरोंकी बताई हुई चूकोंको स्वीकार नहीं करते आप स्वयंको ‘साधक’ कह ही नहीं सकते हैं । ऐसे साधकोंने अपने आस-पासके व्यक्तियोंसे या सह-साधकोंसे अपनी चूकें पूछकर लेना चाहिए एवं सर्वप्रथम उस मौन होकर हामी भरकर स्वीकार करना चाहिए । उसके पश्चात उन चूकोंका आत्मनिरीक्षण कर उसमें वह अंश मात्र भी कहां दोषी है क्या, या आदर्श स्थिति उनका वर्तन कैसा होना चाहिए यह देखें ।
४. ऐसे साधक स्वयं अत्यधिक प्रतिक्रिया एवं क्रोध व्यक्त करते हैं; किन्तु वे स्वयंको अत्यन्त संवेदनशील मानते हैं; अतः वे स्वयं यह अपेक्षा रखते हैं कि उसके आस-पासके व्यक्तिने उन्हें कभी भी प्रतिक्रियात्मक या क्रोधसे कुछ भी नहीं बोलना चाहिए । आपसे कोई आदर्श वर्तन करे, इस हेतु आपको स्वयंका वर्तन आदर्श करना होगा यह सरल सा सिद्धांत ध्यान रख स्वयंमें आवश्यक परिवर्तन करें ।
ऊपरकी श्रेणीके सभी साधकोंमें सदैव ही साधना, साधक, गुरु एवं ईश्वरके प्रति विकल्प आते ही रहता है । साधको ! आनेवाला काल विनाशकारी है; अतः विकल्पोंमें समय व्यर्थ कर अपना बहुमूल्य समय न गंवाएं एवं गुरु या ईश्वरको अपेक्षित ऐसा परिवर्तन स्वयंमें लाएं । आपसे जो भी चूक हुई हो उस हेतु शरणागत होकर गुरु, ईश्वर या अपने ज्येष्ठ साधकोंसे क्षमायाचना करें एवं साधना पथपर आगे बढें ।
ऐसे साधकोंने नामजप, इत्यादि छोडकर सर्वप्रथम अपने दोषोंपर ध्यान देना चाहिए अन्यथा आपके अध्यात्मिक प्रयत्नोंका कोई भी लाभ नहीं मिलेगा और व्यवहारमें जीवन दोषों और अहंके आक्रां क्लेशप्रद बना रहेगा और अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट सदैव ही हावी रहेगा इसलिए चाहे अध्यात्ममें द्रुत गतिसे प्रगति करनी हो या अनिष्ट शक्तियोंके कष्टसे मुक्त होना हो या सुखी व्यावहारिक जीवन व्यतीत करना हो तो यह प्रक्रिया करें एवं जिन्हें कोई विशेष मनोरोग हो तो उन्हें मनोचिकित्सकसे भी सुझाव लेना चाहिए ।

यदि आप इस प्रक्रियाको सीखने हेतु इच्छुक हैं तो आप हमारे व्हट्सऐप्पके साधना गुटमें जुड सकते हैं । इस हेतु आप हमें नीचे दिए गए चलभाष क्रमांकपर अपना सन्देश भेज सकते हैं

*२. कर्मयोगपर भाष्य करना तो सरल, उसे जीवनमें उतारना हैं अत्यन्त कठिन

मैं श्रीमद्भगवद्गीतापर भाष्य करनेवाले अनेक विद्वत जनसे मिली; परन्तु उन्होंने गीताके कर्मयोगके सिद्धान्तको आत्मसात नहीं किए थे और मैं कुछ ऐसे सन्तोंसे मिली जो गीताके उन सिद्धान्तसे अनभिज्ञ थे; क्योंकि उनमें से कुछ तो भक्तिमार्गी थे और कुछ कम पढे लिखे थे; परन्तु वे खरे कर्मयोगी थे ! इससे मुझे समझमें आया कि कर्मयोगपर भाष्य करना सरल है, उसे जीवनमें उतारना अत्यन्त कठिन और जो उतार लेता है, वह सन्त पदपर आसीन हो जाता है !

३. गोवंशके स्थानपर बाघोंको संरक्षण देना कहांकी है बुद्धिमानी ?

वृत्त प्रकाशित हुआ है कि देशमें बाघोंकी संख्यामें ६% की वृद्धि हुई है । किंचित सोचें ! यदि उनकी संख्यामें अधिक वृद्धि हो गई तो क्या होगा ? स्वतन्त्रता पश्चात इस देशमें जितना संरक्षण बाघोंको दिया गया है, उतना ही संरक्षण यदि देसी गोवंशको दिया जाता तो आज इस देशकी अर्थव्यवस्था, समाजका स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि इत्यादि अनेक क्षेत्रोंको लाभ मिलता; किन्तु विवेकशून्य राज्यकर्ताओंको इस तथ्यका बोध नहीं होता; अपितु स्वतन्त्रता पश्चात इस देशमें मूल देशी गोवंशकी संख्यामें अत्यधिक गिरावट आई है एवं यह तथ्य सभी हिन्दुत्ववादियोंके मनमें पीडा उत्पन्न करता है । – तनुजा ठाकुर

उत्तिष्ठ कौन्तेय !
१. गुजरातके वडोदरामें १४ वर्षीय बालिकाका गुरुवार, २८ नवम्बरकी रात्रि दो जिहादियोंद्वारा सामूहिक दुष्कर्मके समाचार सामने आए हैं । बच्ची अपने १६ वर्षीय मित्रके साथ घूम रही थी कि उसे छद्म पुलिस बने दो लोगोंने घसीटा और उसके साथ मारपीट की, युवकको भगाया और बच्चीसे दुष्कर्म किया ! युवती और उसका मित्र डांडिया बाजारकी एक मस्जिदमें उर्स समारोहमें सम्मिलित होने गए थे !

– देशमें बच्चियोंकी इतनी बुरी दशा है और नेता शान्तिसे निद्रामें रत हैं ! क्या ये बेटी किसी बडे नेताकी होती तो तब भी यूं ही शान्ति रहती ? स्वघोषित राष्ट्रभक्त नेताइण इसका उत्तर दें !

२. ब्रिटेनके प्रसिद्ध लंदन ब्रिजके पास शुक्रवारको हुई आतंकी घटनामें २ लोगोंकी मृत्यु हो गई ! इस आक्रमणके संदिग्ध आतंकीको वहीं गोली मारकर ढेर कर दिया गया । अब पुलिसने इस प्रकरणपर कहा है कि संदिग्ध आतंकीका नाम उस्मान खान था, जो इससे पूर्व भी आतंकी गतिविधियों २०१२ से ६ वर्षका कारावास काट चुका है । वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीरमें आतंकियोके प्रशिक्षण हेतु धन एकत्रित करना चाहता था ।

– विश्वभरमें घटित होती आतंकी गतिविधियोंमें सदा एक ही समुदायके व्यक्तियोंका होना इस्लामिक षड्यंत्रको उजागर करता है और यह इस्लामकी ओर बढते लन्दनके लिए व अन्य राष्ट्रोंके लिए एक चेतावनी है !

३. आध्यात्मिक गुरु स्वामी नित्यानन्दके विरुद्ध लगे दो युवतियोंके अपहरणके आरोपमें अब दो बहनोंमेंसे बडी बहनने वीडियो सन्देशमें नित्यानन्दको निर्दोष बताया है और अपने पितापर आरोप लगाया कि उन्होंने आश्रममें रहकर कोट्यावधि रुपएका भ्रष्टाचार किया । जब उसने अपने पिताद्वारा नित्यानन्द आश्रममें की जा रही आर्थिक अनियमिताओंको उजागर कर दिया तो उसके पिताने उसपर दबाव डाला कि वह नित्यानन्दके विरुद्ध दुष्कर्मका आरोप लगाए, किन्तु मना करनेपर उसके पिताने स्वयं ही आरोप लगा दिए !

-इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूर्वनियोजित षडयन्त्रद्वारा हिन्दू सन्तों व महात्माओंपर आरोप लगाकर उनकी छविको धूमिल किया जा रहा है ! ओछी मानसिकतावाले मीडियाद्वारा स्वघोषित ट्रायल चलाकर हिन्दू धर्मको अपमानित किया जा रहा है; अतः अब इनके बहिष्कारका समय है !

४. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डके सचिव जीलानीने राम मन्दिर निर्णयपर कहा कि अवैध रूपसे घुस आई” प्रतिमाको न्यायालय देवता कैसे मान सकता है ? इसप्रकार प्रतिमाको विवादित रहे ढांचेमें स्थापितकर वहां बनी बाबरी मस्जिदका अपमान किया गया है !

– अवैध रामजीकी प्रतिमा नहीं, वरन स्वतन्त्रताके पश्चात भारतमें रह रहे जिलानी सदृश विषैले जिहादी हैं, जिनका स्थान विभाजनके अनुसार पाकिस्तान है, ये हिन्दुओंद्वारा आश्रय दिए जानेके योग्य नहीं; अतः भारत शासन इन्हें देशसे बाहर करनेकी व्यवस्था करे !

सन्त वाणी

ईश्वरीय धनकी खोज करो, पृथ्वीके तुच्छ लुभावने भोगोंकी नहीं ! आन्तरिक कोष प्राप्त करनेपर, आप पाएंगें कि बाहरी क़ष तो सदैव आ ही रहा है ! – लाहिडी महाशय

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५. उपासना समस्या निवारण व परामर्श केन्द्र (उपासना हेल्पलाइन)
आसाध्य रोग, अवसाद (डिप्रेशन), आत्महत्याके विचार आना, अनिद्रा, विवाहमें आनेवाली अडचनें, पारिवारिक कलह-क्लेश, निः सन्तान होना, लगातार असफलता मिलनेसे निराशा होना, वास्तुदोष, कालसर्पयोग, आयमें वृद्धि न होना, पढाईमें मन न लगना जैसी अनेक प्रकारकी समस्याओंको दूर करने हेतु या योग्य परामर्श हेतु सम्पर्क करें !
उपासना समस्या निवारण व परामर्श केन्द्र (ऑनलाइन उपासना हेल्पलाइन)
सम्पर्क क्रमांक : 8956507549
ईमेल : healingatvedic@gmail.com

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