सभी करते हैं मनमानी, इसलिए कष्ट में है हिन्दुस्तानी।

( कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा) :- ——– आजकल के नेतागण जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं । जबकि श्री राम जी जातिवाद को मिटाने के लिए प्रयास करते रहे ।वे हमेशा विप्र, देवता और संत के हितैषी थे, किन्तु जातिवाद के विनाशक थे । लेकिन कुछ पाखंडियों ने श्री रामचरित मानस में चुपके से गलत- गलत लिखकर श्री राम को बदनाम कर दिए। जबकि सच्चाई यह है कि कभी श्री राम ने जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिए,तो अब के नेतागण जातिवादी संगठन क्यों बना रहे हैं?
आप क्यों कहते हैं कि मैं ब्रह्मण हूं , मैं क्षत्रिय हूं, मैं ्वनिया हूं और मैं दलित हूं ? क्या श्री राम जी ने किसी के सामने कभी यह बात कहा कि मैं राजपुत हूं ‌? उन्होंने ने माता शवरी के सामने कहा कि जात-पात नहीं मान विधाता, मानहू एक भक्ति के नाता । गुणहीण नर सोहहि कैसे,बिन जल वारिद देखहि जैसे ।
तब आज के नेतागण किसको धोखा दे रहे हैं? क्यों श्री राम के नाम को बदनाम कर रहे हैं? क्या आप को नहीं पता कि श्री राम जी ने कहा था कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि न छल कपट हिय भावा । अर्थात जिसके मन छल कपट से भरा नहीं हो तो वह मनुष्य मुझे बहुत प्रिय हैं ।परंतु नेता सभी बातों को जानते हुए भी जातिवाद को क्यों फैला रहे हैं ? आप क्यों नहीं भारत के संविधान से जातिवाद को मिटाने के लिए आन्दोलन करते हैं? जबकि सच्चाई आप सभी जानते है। जातिवादी आरक्षण इस देश को बर्बाद कर दिया है। ऐसी स्थिति में नेतागण की चुप्पी देश को खतरे में ले जायेंगे ‌।श्री राम जी के सिर्फ नाम लेकर नेता राजनीति कर रहे हैं, किंतु जातिवाद को मिटाने का भरपूर प्रयास कोई नहीं ‌कर रहे हैं । मीडिया भी असली समाचार को छोड़कर नकली समाचार पाठकों के सामने पेश करके गर्व महसूस कर रहे हैं । किसको क्या कहा जाए? सभी करते हैं मनमानी, इसलिए कष्ट में है हिन्दुस्तानी ।

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