श्री राम ने जाति मुक्त समाज बनाने के लिए सभी कार्य किये थे।

(कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा ):-

डॉ भीमराव अम्बेडकर ने जाति मुक्त समाज नहीं बनाना चाहते थे। इसलिए वे जाति युक्त संविधान बनाकर भारत को खतरे में डाल दिए। श्री राम भारत को जाति विहीन समाज बनाना चाहते थे, लेकिन डॉ भीमराव अम्बेडकर(जो बहुत ही मंद बुद्धि के नेता) ने मानव को जातिवाद के कानूनी -रूपी- रस्सी से बांध दिए। जबकि श्री राम ने कहा था कि

जात- पांत नहीं मान विधाता,मानहु एक भक्ति के नाता।।
गुण रहित नर सोहहि कैसे, बिना जल वारिद देखहि जैसे ।।

. ..आज समाज एवं देश विरोधी लोग कहते हैं कि श्री राम जातिवाद के पोषक थे । वे जाति के नाम पर अकारण ही शंबुक ऋषि को तलवार से उनके गर्दन काट दिए । क्या ऐसी घिनौना काम श्री राम कर सकते थे? नहीं, वे इस तरह के गलत काम कदापि नहीं कर सकते थे ।भला जो श्रीराम स्वयं कहते थे कि -जात पात नहीं मान विधाता।मानहूं एक भक्ति के नाता ।। तब ऐसे विचार रखने वाले श्रीराम शंबुक ऋषि को क्यों मारते? कोई कहते हैं कि किसी ब्राह्मण के कहने पर सिर्फ बिना कारण के श्रीराम ने शंबुक को तलवार से काट दिए । क्या ऐसा संभव हो सकता था ? यदि किसी को यह लगता है कि श्री राम ने शूद्र वर्ण में जन्मे शंबुक को मार दिए , यह घटना पूरी तरह असत्य है।इस घटना पर कोई भी पुर्ण रूप से विश्वास नहीं करेगा , क्योंकि तब प्रश्न उठता है कि श्री राम ने किस जाति में जन्मे शंबुक को मारा? जब शंबुक वध की घटना लिखने वाले को शंबुक की जाति का नहीं पता है, तो कोई यह कैसे विश्वास कर लेगा कि श्री राम ने शूद्र वर्ण की के शंबुक को मारा था ? अर्थात श्रीराम पर यह निराधार आरोप है क्योंकि किसी को नही पता कि बिना जाति के शंबुक शूद्र कैसे हो गये ?इससे निष्कर्ष निकलता है कि श्रीराम जी ने किसी शंबुक को नहीं मारे थे । सिर्फ़ राम विरोधियों ने वदनाम करने की भावना से ऐसी घटना लिखकर दुष्प्रचार किए थे।।अतः पाठकगण वैसे लोगों के विचार पर ध्यान नहीं दें।

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