भारत के संविधान नहीं; अपितु देश खतरे में है ।

KRANTI NEWS GAZIYABAD , (कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा ‌) ………………….. …. …………… दलित वर्ग के नेता इस देश में शोर मचाकर कहते रहते हैं कि भारत का संविधान खतरे में है । वे नेता दलित वर्ग के लोगों को सच-सच बात बिल्कुल बताते नहीं हैं। वे सब अपनी स्वार्थ पूर्ति करने के लिए गलत को गलत और सही को सही कहने को तैयार नहीं हैं । अगर जो नेता सच बोलता भी है तो उसे दलित वर्ग के नेता सच बोलने बालों को दलित विरोधी कहकर प्रचार करने लगते हैं ।यही कारण है कि हमारे देश में भ्रष्टाचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। जब हमारे देश के नेता हीं सच के स्थान पर झूठ बोलेंगे तो देश में भ्रष्टाचार क्यों नहीं बढ़ेगा ? इस देश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े कारण जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था है। देश में गरीबी के मानदंडों पर आधारित आरक्षण व्यवस्था इतनी गलत नहीं है, जितनी की जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था । इस व्यवस्था से भारत का संविधान नहीं; अपितु देश खतरे में है ।
सभी लोग जानते हैं कि जातिवाद देश की एकता और विकास में बाधक है । जातिवाद के कारण इस देश में भ्रष्टाचार काफी चरम सीमा पर बढ़ गई हैं।आपस में भारतीय जनता अकारण हीं जाति के नाम पर एक- दूसरे को खून बहाने पर उतारू हैं । आश्चर्य की बात तो यह है कि इस देश को महान बताने वाले नेता हीं जाति के कारण फैले कलह को देखकर काफी खुश नजर आते हैं ।जो जाति पर राजनीति की रोटी सेंकते हैं, वे नेता चाहते हैं कि ऐसा हीं लड़ाई जाति के नाम पर हमेशा होते रहे । वैसे नेताओं को इस देश की एकता एवं विकास की कोई चिंता नहीं हैं । अगर आज के नेता इस देश का समग्र विकास दिल से चाहते हैं तो फिर जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था को जल्द- से- जल्द संविधान से क्यों नहीं हटाने का प्रयास करते हैं? आज क्यों इस मुद्दे पर नेता चुप हैं? आज के नेता जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ कोई कुछ खुलकर बोलने से क्यों डर रहे हैं? अगर नेता एवं जनता वाकई में जातिवाद से परेशान हैं तो फिर इस व्यवस्था को मिटाने के लिए भारत के कानून में संशोधन कराने के लिए सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाते हैं?………………..
आज आप सभी जानते है कि जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था से एससी, एसटी एवं बीसी वर्ग के गरीब एवं अमीर-दोनों को आरक्षण का पुरा- पुरा लाभ उठा रहे हैं । लेकिन सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण सिर्फ दस प्रतिशत गरीब लोगों को दिए गए हैं । आखिर यह कहां का न्याय है कि अन्य वर्ग के लोगों को सिर्फ जाति के नाम पर चाहे वह गरीब हो अथवा अमीर- दोनों को आरक्षण मिलेंगे, लेकिन सामान्य वर्ग में सिर्फ गरीब लोगों को ? मैं आज के किसी भी नेता से प्रश्न पुछना चाहता हूं कि जाति के नाम पर एससी,एसटी और बीसी वर्ग के अमीर ( धनवान) को आरक्षण क्यों दिए जाते हैं? सामान्य वर्ग के अमीर ( धनवान) को आरक्षण क्यों नहीं? क्या सामान्य वर्ग के अमीर ( धनवान) और अन्य वर्ग के अमीर ( धनवान) में कोई अंतर है क्या? भला ऐसे कानून को लागू रहने से भ्रष्टाचार कैसे मिटेगी? क्यों नहीं इस देश में सभी को आर्थिक आधार पर सिर्फ गरीब लोगों को आरक्षण की व्यवस्था किए जाते हैं? अगर आर्थिक आधार पर सभी वर्गों के गरीब लोगों को आरक्षण दिए जायेंगे तो इस क़ानून से सरकारी सुविधाएं लेनें में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं होगी।साथ ही साथ भारत में सभी लोगों के बीच सद्भावना, एकता एवं भाईचारा बढ़ेंगे । लेकिन भारत देश के नेता सब कुछ जानते हुए भी सामान्य वर्ग के लोगों के साथ अन्याय क्यों कर रहे हैं ? क्या आप इस देश में जातिवाद के नाम पर लोगों के बीच लड़ाई देखना चाहते हैं? आप अगर इस देश में भ्रष्टाचार मिटाने के लिए उत्सुक हैं तो सबसे पहले इस देश में जातिवाद पर आधारित आरक्षण व्यवस्था को जल्द- से -जल्द खत्म करने का ठोस प्रयास करें । इसके अलावा इस देश में जातिवाद का कोई प्रमाण पत्र नहीं बनाना चाहिए । सभी को इस देश में जाति और धर्म के स्थान पर भारतीय नागरिक एवं गरीबों को पहचान करने का प्रमाण पत्र मिलना चाहिए, अन्यथा जातिवाद पर इस देश में भ्रष्टाचार काफी बढ़ जायेगा । अगर समय रहते हुए भारत सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं करेगी, तो जनता इस मुद्दे पर बहुत बड़ी आंदोलन करेंगे, जिसे सरकार को शांत करना असम्भव हो जायेगा ।…………..
अतः इस देश के नेता जल्द ही जातिवाद को मिटाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए शांति ढंग से आंदोलन का शुभारंभ कर देना चाहिए haveक्योंकि यह कार्य भ्रष्टाचार को मिटाने में सहायक होगा । देश में भ्रष्टाचार के बढ़ते कदम को रोकने के लिए संविधान से जातिवाद को खत्म करना अनिवार्य है ।….

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क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल