रामानुज मठ, गया ( बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं ।- इस समाचार के चौथे भाग यहां से पढ़िए

KRANTI NEWS BIHAR , (कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह )…
जब भ्रष्टाचार के मामले में गलत साबित होने पर सिविल लाइंस थाना प्रभारी श्री उदय प्रताप सिंह अपने पद से निलंबित हो गये, तब 14/8/98 को मेरे बड़े भाई डां० बच्चू नारायण सिंह ने दिल्ली से वजीरगंज, गया के पते पर मेरे नाम से एक पत्र लिखकर भेजे थे, जिसमें लिखा हुआ था कि बलिहारी चौका, मोहम्मद गंज स्टेशन, जिला-गढवा के रहने वाला सुजित कुमार पाण्डेय जी ने बताया है कि मध्यप्रदेश में जो संस्कृत विश्वविद्यालय है, उसके बारे में श्री राघवाचार्य जी एवं देवनारायण आचार्य जी को पता है। कवि जी, तुम महात्मा जी से बोलो कि वह कछला बिरीज़, पुलिस स्टेशन के पास स्थित राधाकृष्ण मठ से संपर्क करके अवध सिंह एवं दिलीप सिंह को गया वापस बुलायें । मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं पागल की तरह दौड़ता रहूं । मैं ग्वालियर गया था, लेकिन वहां सुजित कुमार पाण्डेय मुझे नहीं मिला । बाद में वह मुझे दिल्ली में मिला । इस पत्र के बाद डॉ बच्चू नारायण सिंह ने मुझे दूसरी पत्र लिखकर भेजे थे, जिसमें लिखा हुआ था कि मैं सुरजीत कुमार पाण्डेय जी के पिताजी का नाम लिखकर भेज रहा हूं, जो जिला- पलामू के रहने वाले हैं ।उनका नाम स्वर्गीय श्री रामानुज दूबे जी हैं ।वे गांव- बलिहारी, पोस्ट- सुनौरा, जिला- गढवा( पलामू), बिहार के निवासी हैं । वहां जाकर अवध सिंह और दिलीप सिंह के बारे में पता लगाना । सुरजीत कुमार पाण्डेय जी ने मध्यप्रदेश में संस्कृत विश्वविद्यालय का पता बहुत खोजा, लेकिन उसको वहां नहीं मिल पाया । ऐसे कोई नरवर मध्यप्रदेश में जगह है, संस्कृत विश्वविद्यालय है। यहां अवध सिंह और दिलीप सिंह को पढ़ने की सूचना मुझे मिला है । अतः तुम राघवाचार्य जी को जाकर बोलो कि आप संस्कृत विश्वविद्यालय से संपर्क करके अवध सिंह और दिलीप सिंह को गया बुलायें । या राघवाचार्य जी को कछला ब्रिज स्थित राधाकृष्ण मंदिर के महंत श्री उपेन्द्र आचार्य जी से संपर्क करें तथा उन दोनों को घर वापस आने बोले । तुम केवल गया से सारा काम करो । इसके बाद मैंने राघवाचार्य से पूछा कि अवध सिंह और दिलीप सिंह को आप कहीं से भी खोजकर मेरे पास लाइये । लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि मैं कहां से ढूंढकर लाऊं ? हो सकता है दोनों पाकिस्तान चला गया हो । तब मैंने उनसे कहा कि आप पागल हो गए हैं क्या? वे दोनों श्री देवनारायण जी के साथ पढ़ने के कारण गये थे । फिर वे पाकिस्तान में जाकर क्या करेंगे ? आप मुझे राजनीति नहीं सिखायें । मैं आपको समय दे रहा हूं दोनो को पता लगाकर जल्दी ही बतायें, अन्यथा हमसे बूरा कोई दूसरा नहीं मिलेगा । मैं जा रहा हूं और कान खोलकर सुन लीजिए कि मेरी बात को जरूर ध्यान में रखियेगा ।…….
इसके बाद मैंने अपने बड़े भाई से मिलने नयी दिल्ली गया था। वहां बड़े भाई ने मुझे सुरजीत कुमार पाण्डेय जी के द्वारा लिखा हुआ पत्र दिखाये, जिसे मैंने पढ़ा । इस पत्र को पढ़ने के बाद मुझे पता लगा कि श्री देवनारायण आचार्य जी क्या- क्या करते थे ? मुझे इनके बारे में सब कुछ पता चल गया कि वे साधू के भेष में कलयुग के रावण है । अब आप पढ़िए कि इस पत्र में कलयुग के रावण के बारे में क्या- क्या लिखा‌ हुआ है? यह पत्र ग्वालियर से 13/11/97 को सुरजीत पांडेय ने मेरे बड़े भाई डॉ बच्चू नारायण सिंह के नाम से लिखा था । उन्होंने मेरे बड़े भाई को संबोधित करते हुए लिखा था कि- भाई साहब नमस्ते, मैं सुरजीत पांडेय ग्वालियर से लिख रहा हूं ।भाई जी आपका पत्र मिला ।5/11/97 को पत्र पढ़कर पता चला कि आप अवध और दिलीप का बड़ा भाई है । आप उन दोनों को चार साल से खोज रहे हैं । ऐसा भाई बहुत कम हीं मिलते हैं ।भाई जी, मैं क्या बतलाऊं? इसमें बहुत बड़ा राज है । आप इतना समझ लीजिए कि अवध और दिलीप जहां भी है,वे दोनों ठीक है । और उनलोग साधू हीं बनना चाहते हैं। और साधू हीं बनेंगे । शायद आप से भेंट होने के बाद उसका दिमाग बदल जाये, लेकिन इतना समझ लीजिए कि अवध और दिलीप हमारे साथ कछला से दिल्ली नहीं आते हैं ।रही तो रोज ही हमलोग साथ में बहुत दिनों तक रह चुके हैं । क्योंकि हम भी साधू बन ‌चुके थे ।मगर हमारे भाई हमको पाने के लिए बहुत कुछ किए , यह बात हमको नहीं चलने देता था ।लोग कि तुम्हारा भाई इतना परेशान हैं । तुम्हें भी खोजने में इसी प्रकार अवध और दिलीप को भी नहीं पता है कि आप इतना परेशान हैं । क्योंकि उनके पास कुछ भी नहीं बताया जाता होगा । भाई साहब उनलोग पढ़ रहे होंगे संस्कृत । आप एक काम कीजिए ।उन लोग नरवर में पढ़ रहे हैं । लेकिन आप वहीं जाइयेगा तो आपको अंदर नहीं जाने दिया जाएगा । इसलिए एक लड़का है वहां पर ।उसका पता बाद में दूंगा । पहले आप मेरा गुरुजी देव नारायण स्वामी को पकड़िए जम कर । और सीधा अंगुली से घी नहीं निकलता । आप अपनी ताकत दिखा दीजिएगा तो शायद बता देंगे गुरूजी। अगर नहीं बता पायेंगे तो मेरे पास एक पत्र भेजीयेगा । मैं उस लड़का का पता देंगे, जिससे मिलने से पता चल सके ।वह लड़का हमारे ‌तरफ का हीं है ।मगर उससे भी बोला ‌गया होगा कि किसी को मत बताना उन दोनों के बारे में ।मगर भाई साहब गुरूजी ( देव नारायण आचार्य ) को तो एक बार पकड़िए । उसके बाद हमारे पास पत्र भेजिएगा । अवध और दिलीप के नाम बदला गया है । विशेष मिलने पर, सुरजीत पांडेय ।मेरा पता- बीरेंद्र कुमार महलवार c/ o, सुरजीत पांडेय, ठाठीपुर,1641, विद्या विहार, ग्वालियर , मध्यप्रदेश । यह पत्र हमारे बड़े भाई डॉ बच्चू नारायण सिंह के नाम एवं c/o- डॉ सुरेंद्र चड्डा, पाटलिपुत्र नरसिंग होम , समयपुर बादली, दिल्ली,110042 ……..

इसके बाद मैं दिल्ली से गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में रहने लगा और अपने ‌भाई को पता लगाने के लिए पूर्वाचल पथ, समाचार पत्र में एक विज्ञापन प्रकाशित कराया, जिसका शीर्षक था- पता बताइए, एक लाख रूपए का इनाम पाइए । इस विज्ञापन को मैंने नवंबर,2004 में प्रकाशित कराया था । विशेष इस अंक का पांचवा भाग बाद में पढ़िए । आप विज्ञापन की छायाप्रति अवश्य देखें ।

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