रामानुज मठ, गया,(बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं–इस समाचार के तीसरी भाग यहां से पढ़िए —-+—-

(-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा )…..मैं रामानुज मठ, गया (बिहार) में श्री राघवाचार्य जी को चेतावनी देकर दूसरे दिन सिविल लाइंस थाना गया था । वहां पहुंचने के बाद मैंने राघवाचार्य एवं संत देव नारायण आचार्य के खिलाफ शिकायत लिखकर थाना प्रभारी को दिया । लेकिन इस केस को सिविल लाइंस थाना प्रभारी ने स्वामी राघवाचार्य जी के ‌दवाब में दर्ज नहीं किए । तत्पश्चात गया के प्रसिद्ध वकील श्री कृष्ण सिंह के द्वारा लिखित रूप से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सी.जी.एम.) गया को लिखित शिकायत पत्र दिए ,जिसकी कंप्लेंट केस नंबर-550/98 है ।यह केस अवध सिंह और दिलीप सिंह के बड़े भाई कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा 31/07/98 को किया गया था । इस कांड में आई. पी. सी. के तहत अपराध की धारा 365,364 एवं 346 लगाया गया था । इसके बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने सिविल लाइंस थाना प्रभारी को नोटिस जारी किए, जिसमें प्रभारी उदय प्रताप सिंह से पूछा गया था कि आपने कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा लिखित शिकायत क्यों नहीं दर्ज किए? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के पास एक पत्र में लिखकर जवाब दिए, जो निम्नलिखित हैं—-+–++++-+-+.. ज्ञापांक 1321/98…..
………. दिनांक-24/9/98….
सेवा में, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, गया …
आपका ज्ञापांक 1667 दिनांक 10/08/98………….
महाशय,,…..
उपरोक्त वर्णित ज्ञापांक से शादी अनिरुद्ध सिंह का कंप्लेंट केस थाना में प्राप्त हुआ है, लेकिन कम्पलेंट केश का ग्राउंड अपठनीय है , जिसके कारण कांड दर्ज करने में कठिनाई हो रही है ।………….
अतः आपसे अनुरोध है कि शादी को पठनीय कम्पलेंट केस के ग्राउंड का दूसरी कांपी थाना में भेजवाने का किरपा किया जाय , ताकि कांड दर्ज किया जा सके ।.. विश्वास साजन…..
उदय प्रताप सिंह..

24/9/98……
जब मैं यह लेकर पढ़ा, तब मुझे यह विश्वास हो गया कि इस देश में भले ही भारत का राष्ट्रीय वाक्य ‘सत्यमेव जयते ‘ लिखा हुआ हो, लेकिन सच्चाई यह है कि हर जगह झुंड का हीं बोलबाला है । रिश्वत के आगे सभी सच्चाई को छिपाने लगते हैं । यही कार्य सिविल लाइंस थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह ने किए थे । उन्होंने महंत राघवाचार्य से रिश्वत लेकर सफेद कागज पर टाइप किया गया केस को नहीं पढ़ पाए । भला इससे बड़ा संसार में क्या आश्चर्य हो सकता है? इतना ही नहीं , उन्होंने सी. जी. एम. गया को भी लिखकर भेज दिया कि कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा लिखित रिपोर्ट अपठनीय है अर्थात पढ़ने लायक नहीं हैं । आप सभी सोच सकते हैं कि जिस रिपोर्ट को वकील और जज दोनों पढ़ लें रहें हैं,उस रिपोर्ट को थाना प्रभारी क्यों नहीं पढ़ पा रहें हैं? फिर इसी रिपोर्ट को दूसरी बार टाइप कराकर क्यों मांग रहे थे? मैंने इस रिपोर्ट को लेकर थाना प्रभारी के पास गया और बोला कि अगर आपको कोई चीज नहीं दिखाई पड़े, तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि यही चीज दूसरे को दिखाई नहीं पड़े । अगर आपको यह रिपोर्ट नहीं पढ़ा जाता है , तो आप अपने आंखों को इलाज कराईये । यह आपकी अपनी आंख की कमजोरी है । आप अपनी आंख की कमजोरी के कारण किसी दूसरे के रिपोर्ट को अपठनीय क्यों और कैसे बता सकते हैं ? तब मेरी बात को सुनकर उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इसकी दूसरी कांपी टाइप कराकर हमें दीजिए । मैंने फिर उनसे कहा कि जब इस रिपोर्ट को सभी पढ़ लेते हैं तो आपको मैं इसकी दूसरी कांपी टाइप करा कर क्यों दूं? अगर आपको केस दर्ज करना है तो करिए, अन्यथा मैं यहां से वापस अपना घर जाता हूं । तब उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जाइये अपने घर पर आराम कीजिए । आपका केस दर्ज नहीं होगा । तब मैंने कहा कि ठीक है, मैं जा रहा हूं, लेकिन इसका फैसला भगवान करेंगे , आप नहीं ।…
।। इसके दो सप्ताह के भीतर मैं एक समाचार पत्र खरीदा, जिसमें शीर्षक था कि,,- सिविल लाइंस थाना प्रभारी निलंबित । इस पत्र का छायाचित्र आपके सामने है । तब मुझे यह विश्वास हुआ कि भगवान के घर में देर है, किंतु अंधेर नहीं ।पापी चाहे कितना भी झूठ बोलकर फायदा उठा ले, लेकिन उसका अंत में पराजय निश्चित है । …..इसका शेष भाग अगले अंक में पढ़िए ।

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